Saturday, September 26, 2015

चंडीगढ़ के लेखक श्री एस पी सिंह कब मेरे अजीज दोस्त बन गए ,पता नहीं चला।उनके आत्मीय आमंत्रण [पर पहुंचा था मैं। सिर्फ एक समानता कि दोनों ने अभिनेत्री साधना पर लिखा है , इस रविवार एस पी साहब की पुस्तक पर चर्चा गोष्ठी में शामिल होने का अवसर मिला। शहर की जो तारीफ सुनी थी उससे भी बेहतर महसूस किया , वहां अभी हल्की ठण्ड शुरू हो गई है , आने वाले dec. महीने में क्रिसमस और नए साल का जश्न रहेगा ,फिर जनवरी में चंडीगढ़ कार्निवाल जिसका सभी को इन्तजार रहता है। इसके बाद फ़रवरी में रोज़फेस्टिवल की धूम रहेगी। एक जिन्दा शहर। क़ला और साहित्य से गहरा सरोकार रखने वाले शख्स कई मिले जिनमें ना केवल साहित्य अकादमी के सचिव माधव जी ,दूरदर्शन के निर्देशक रत्तू साहब और तो और खाद्य मंत्री आदेश प्रताप सिंह कैरों भी शामिल हैं। इन सभी से खूब बातें हुईं। शहर की खामोश झील भी बहुत कुछ कहती नजर आई. रॉक गार्डन देखने का अपना अलग आनंद है.
चंडीगढ़ जो कभी मेरे लिए शहर था , अब एक याद है। 28 october 2014 

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