लघु कथा
स्वदेशी अभियान
शहर के अनेक समाजसेवी आज एक पांच सितारा होटल में मिले। आज का विषय था -खाना खाने के पहले कोई संकल्प भी लिया जाये।अनेक सामाजिक कुरीतियों पर बातचीत हुई। तय यह हुआ कि अब कोई नया विषय चुना जाए। विदेशी वस्तुओ के अधिक इस्तेमाल से शुरू बहस का समापन इस फैसले से हुआ कि आने वाला महीना स्वदेशी अभियान को समर्पित हो और जोर- शोर से यह अभियान संचालित किया जाये। शुद्ध स्वदेशी का प्रचार- प्रसार हो । बस फिर क्या था -अगले हफ्ते होने वाली पार्टी का स्थान एक वनवासी इलाके का पारंपरिक रेस्ट हाउस था। दारू भी देसी थी और मुर्गा भी देसी। समाजसेवियों ने स्वदेशी को ही अपनाया।
लेखक -अशोक मनवानी
स्वदेशी अभियान
शहर के अनेक समाजसेवी आज एक पांच सितारा होटल में मिले। आज का विषय था -खाना खाने के पहले कोई संकल्प भी लिया जाये।अनेक सामाजिक कुरीतियों पर बातचीत हुई। तय यह हुआ कि अब कोई नया विषय चुना जाए। विदेशी वस्तुओ के अधिक इस्तेमाल से शुरू बहस का समापन इस फैसले से हुआ कि आने वाला महीना स्वदेशी अभियान को समर्पित हो और जोर- शोर से यह अभियान संचालित किया जाये। शुद्ध स्वदेशी का प्रचार- प्रसार हो । बस फिर क्या था -अगले हफ्ते होने वाली पार्टी का स्थान एक वनवासी इलाके का पारंपरिक रेस्ट हाउस था। दारू भी देसी थी और मुर्गा भी देसी। समाजसेवियों ने स्वदेशी को ही अपनाया।
लेखक -अशोक मनवानी
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