स्वतंत्रता आंदोलन में सिंध का महत्वपूर्ण योगदान
जब अखंड भारत था ,सिंध प्रान्त अफगानिस्तान और अरब के नजदीक सीमा पर स्थित होने के कारन आक्रामकों का निशाना रहा। सिंध पर राजा डाहर के कुछ गद्दारों की वजह से मुगलो ने कब्ज़ा किया जो कई सदियों तक रहा ,फिर अंग्रेज जमे रहे। वर्ष 712 से लेकर 1947 तक हम गुलाम रहे। इस बीच पूरे देश की तरह सिंध प्रदेश भी आजादी के आंदोलन का अहम कार्य क्षेत्र रहा।
एक अखबार के आठ संपादकों को कारावास
सिंध के एक अख़बार हिन्दू के एक के बाद एक करके आठ समपादको को जेल में बंद किया गया क्योंकि वे ब्रिटिश सत्ता का सीधा विरोध करते थे। प्रमुख रूप से हरकिशन गुरदासमल , नाथूराम शर्मा , मंघाराम लुल्ला , नेनूराम शर्मा , हसाराम पमनानी, नारायणदेव आर्य सीतलदास भेरुमल , भगत कंवरराम ऐसे सेनानी हैं जिन्होंने राष्ट्र रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। भारतीय सेना में वायु और जल सेनाध्यक्ष एडमिरल तहलियानी साहस के कारण जाने गए। मुंबई में लेखक और क्रांतिकारी कीरत बाबानी जिनकी आयु 91 वर्ष है सिंधु संस्कार को पूर्व में एक विशेष साक्षात्कार में आजादी की मुहीम में सिंधी भाइयो के योगदान के बारे में विस्तार से बता चुके हैं। 0 अशोक मनवानी ( ब्लॉग बातें -मुलाकातें ) 2013
जब अखंड भारत था ,सिंध प्रान्त अफगानिस्तान और अरब के नजदीक सीमा पर स्थित होने के कारन आक्रामकों का निशाना रहा। सिंध पर राजा डाहर के कुछ गद्दारों की वजह से मुगलो ने कब्ज़ा किया जो कई सदियों तक रहा ,फिर अंग्रेज जमे रहे। वर्ष 712 से लेकर 1947 तक हम गुलाम रहे। इस बीच पूरे देश की तरह सिंध प्रदेश भी आजादी के आंदोलन का अहम कार्य क्षेत्र रहा।
एक अखबार के आठ संपादकों को कारावास
सिंध के एक अख़बार हिन्दू के एक के बाद एक करके आठ समपादको को जेल में बंद किया गया क्योंकि वे ब्रिटिश सत्ता का सीधा विरोध करते थे। प्रमुख रूप से हरकिशन गुरदासमल , नाथूराम शर्मा , मंघाराम लुल्ला , नेनूराम शर्मा , हसाराम पमनानी, नारायणदेव आर्य सीतलदास भेरुमल , भगत कंवरराम ऐसे सेनानी हैं जिन्होंने राष्ट्र रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। भारतीय सेना में वायु और जल सेनाध्यक्ष एडमिरल तहलियानी साहस के कारण जाने गए। मुंबई में लेखक और क्रांतिकारी कीरत बाबानी जिनकी आयु 91 वर्ष है सिंधु संस्कार को पूर्व में एक विशेष साक्षात्कार में आजादी की मुहीम में सिंधी भाइयो के योगदान के बारे में विस्तार से बता चुके हैं। 0 अशोक मनवानी ( ब्लॉग बातें -मुलाकातें ) 2013

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