लघुकथा
वेलकम -वेलकम
बात -बात में ओढ़ी हुई विनम्रता के साथ भैया जी "वेलकम -वेलकम "कहने के आदी थे.
किसी भी जगह ,किसी भी मौके पर मित्रो से मिलते ही वे पूरी ताकत लगा कर हाथ मिलाते और आदत के मुताबिक़ कहते थे "वेलकम -वेलकम .
आईये सर स्वागत है आपका "
भैया जी से आज गलती यह हो गयी ,उन्होंने विश्राम घाट में शोकाकुल परिवार के एक व्यक्ति को ही यह तकिया कलाम सूना दिया ,वह भी एक बार नहीं ,तीन -चार बार .एक साथ 4 - 6 लोगो ने उनकी इस हरकत के लिए उन्हें खूब खरी -खोटी सुनायी और उपदेश सुनाये सो अलग. गनीमत थी ,भैया जी की बस धुनाई नहीं हुई,लेकिन आज उन्हें इतना अहसास हो गया ,हर जगह नहीं बोलना चाहिए इस तरह -
"वेलकम- वेलकम."
किसी भी जगह ,किसी भी मौके पर मित्रो से मिलते ही वे पूरी ताकत लगा कर हाथ मिलाते और आदत के मुताबिक़ कहते थे "वेलकम -वेलकम .
आईये सर स्वागत है आपका "
भैया जी से आज गलती यह हो गयी ,उन्होंने विश्राम घाट में शोकाकुल परिवार के एक व्यक्ति को ही यह तकिया कलाम सूना दिया ,वह भी एक बार नहीं ,तीन -चार बार .एक साथ 4 - 6 लोगो ने उनकी इस हरकत के लिए उन्हें खूब खरी -खोटी सुनायी और उपदेश सुनाये सो अलग. गनीमत थी ,भैया जी की बस धुनाई नहीं हुई,लेकिन आज उन्हें इतना अहसास हो गया ,हर जगह नहीं बोलना चाहिए इस तरह -
"वेलकम- वेलकम."
( लघु कथा संग्रह मिथ्या -मंजिल से ,प्रकाशन वर्ष -2005)
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