सागर के मोती
कार्यक्रम बहुत होते हैं , स्थायी याद कम कार्यक्रमों की बन पाती है . हर साल भाई राजेश सागर बुलाता था ,कार्यक्रम का नाम होता -हंगामा -2011 ,हंगामा -2013 .. मैंने कहा जब यह नाम बदलोगे ,आ जाऊँगा ,सो इस साल भाई मान गया (शायद बे-मन से ) मैंने एफ बी और ई मेल से आये आमन्त्रण पत्र पर,फिर से चेक करने की आदत के मुताबिक दोबारा नजर डाली ,भाषा ठीक थी ,कार्ड का आकल्पन भी जमा ,फिर अपन ने सागर की ट्रेन पकड़ ली , रविन्द्र भवन ,सागर पूरा भरा था . कार्यक्रम संचालन का दारोमदार छोटे भाई विजय ने सम्हाला , जानी -मानी एंकर भोपाल की मेघा ठाकुर के साथ . बात कुछ जम ही गई ... बच्चे ,किशोर नए गीतों पर नाचे और घंटों गाते रहे ,ये तो ठीक रहा पर एक बात ने मन को बहुत खुश किया -कार्यक्रम के बीच दो प्रतिभागियों के मध्य लगने वाले समय का रचनात्मक उपयोग, वो भी सागर की शान बढ़ाने वालो के नामोल्लेख के साथ . विजय ने लम्बी श्रृंखला चला दी -मुझे गर्व है उस सागर पर जिसने डॉ हरिसिंह गौर जैसा दानवीर पैदा किया , सागर झील का निर्माता लाखा बंजारा ,ज्वाला प्रसाद ज्योतिषी जैसा सेनानी ,भाई अब्दुल गनी जैसा देशभक्त पत्रकार ,गीतकार विट्ठल भाई पटेल .... कितने ही शख्स याद किये गए ---भुवन भूषन देवलिया ,कवि पदमाकर ,त्रिलोचन जी ,रमेश दत्त दुबे ,विजया राजे सिंधिया ,दादा डालचंद जैन ,गोवा मुक्ति आंदोलन की योद्धा सहोदरा राय ,अभिनेता गोविन्द नामदेव,संगीत साधक ओमप्रकाश चौरसिया ,हर्ष चतुर्वेदी ,रघु ठाकुर ,मुंशी प्रेमचंद की इकलौती बेटी कमला देवी ... मानो भावनाओं का सागर उमड़ पड़ा हो … अपनी जमीन और जनता से जुड़े 50 से अधिक बेमिसाल लोगों की याद ,बेहद श्रृद्धा के साथ . और अतिथियों के साथ ख्यात लोक नृत्य और कला निर्देशक (मेरे गुरु भी ) विष्णु पाठक जी भी मौजूद थे इन लम्हों के . बधाई मेरे भाई राजेश मनवानी . ( 9th feb 2014 को लिखा सागर में आयोजित कार्यक्रम का अनुभव )
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