Thursday, September 24, 2015

ma pitambara peeth

मध्यप्रदेश के आध्यात्मिक, धार्मिक और साहित्यिक गतिविधियों के केंद्र दतिया में कुछ ऐसे शख्स हैं जो इस अंचल की पहचान बन गए हैं । मां पीताम्बरा के उपासक और प्रसिद्ध पीताम्बरा पीठ के साधक डॉ हरिसिंह" हरीश "लगभग दो दर्जन कृतियों के सृजक । डॉ हरीश ने पद्य लेखन में सतत साधना की है । जब कभी मैं दतिया जाता हूं डॉ हरीश से मेरी भेंट हो ही जाती है । इस बार जब मां पीताम्बरा मंदिर से बाहर निकल रहा था, डॉ हरीश सामने आते दिखे, चाल में वही उत्साह, उनके चेहरे पर झुर्रियां हल्की ही है । कोई निराशा नहीं, कोई उदासी नहीं, प्रफुल्लित मन से उन्होंने स्वागत किया । बोले - "इस बार तो मेरे घर चलना ही होगा, साथ चाय पिएंगे, कुछ गपशप करेंगे । " और हम दोनों मंदिर से चल पड़े- पैदल-पैदल ,गांधी मार्ग स्थित नया दरवाजा की ओर ...। डॉ हरीश ने बताया नाम नया दरवाजा है, है वो प्राचीन ही । शहर का केंद्र स्थल । पास ही चौराहे के एक तरफ एक बड़ा होर्डिंग लगा है जिस पर लिखा है-" उड़ान भरता दतिया ।" बुजुर्ग साहित्यकार ने बताया ‍- "चार -पांच साल से दतिया कस्बे ने एक विकसित हो रहे शहर में खुद को बदल दिया है ।"  डॉ हरीश ने घर का नामकरण भी किया है । सुमन साहित्य सदन । घर पुराने तरह का है । छोटे से आंगन(जहां तुलसी जी चबूतरे में शोभायमान हैं)से होकर हम डॉ हरीश के बैठक कक्ष में पहुंचे । गाहे-बगाहे इसी हाल-नुमा कक्ष में साहित्यिक गोष्ठियां भी वे करते रहते हैं । यहां अलमारियों में उत्कृष्ट हिंदी साहित्य संग्रहित है । 
डॉ हरीश की पुस्तकों में प्रमुख हैं :-सप्तशिखा, उलाहना, बच्चों पढ़ने जाओ रोज, शुभम, मानवता का बगीचा, दतिया काव्य धारा, श्री गुरु मां चरणों की धूल, बच्चों की मीठी मुस्कान, उन्मेष, गम लेके फूल दिए , काव्यांजलि, दायरा, सनद, मेरा खत न मिलने पर, कली भंवरे और कांटे, दर्द की सीढ़ियां ।
जिस तरह साहित्य और सिनेमा का गहरा संबंध है, उसी तरह डॉ हरीश भी मधुबाला, वहीदा रहमान और साधना जैसी अभिनेत्रियों से लगाव रखते हैं । डॉ हरीश ने फिल्म पत्रिका माधुरी के अनेक पुराने अंक संजोकर रखे हैं । मुझे डॉ हरीश से मुलाकात और बातचीत के बाद सबसे सुखद यह बात लगी कि आयु उनकी रचनात्मकता में कहीं बाधा नहीं है। 

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