Friday, November 6, 2015

मुंशी प्रेमचंद जयंती पर एक कार्यक्रम में लमही जाना हुआ जो बनारस शहर से लगा हुआ गांव  है .report
 डॉ नारायण  सामताणी जी बनारस में रहते हैं। कुछ माह पहले भेंट हुई। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में बौद्ध अध्ययन विभाग से सेवानृवित्त  हैं। उन्होंने  संस्कृत को  पाली से अलग किया। अलग विभाग बना। आज भी 93  की आयु में मस्तिष्क गतिमान है। दादा को अमेरिका से आमंत्रण आते हैं। व्याख्यान और शोध निर्देशन के लिए.



डॉ नारायण सामताणी के साथ    बनारस में एक मुलाकात की तस्वीर 
31  जुलाई 2015





















 हार्दिक शुभकामनाएं। 

Tuesday, October 13, 2015

माउंटनमैन  मांझी  की भावना
नवरात्रि  पर्व  पर अनेक प्रख्यात मंदिर जनता की श्रद्धा के केंद्र होते हैं। यहाँ इंतजाम भी जरुरी हो जाते हैं , खासकर जब पहले  कोई  हादसा हुआ हो , तब प्रशासन की पहली प्राथमिकता  यही होती है कि श्रद्धालुओं को तकलीफ न हो , ऐसी व्यवस्थाएं कर ली जाएँ। दतिया जिले के रतनगढ़  में बहुत कम समय में प्रशासन ने रास्ता चौड़ा और सुविधाजनक बनवाने में कामयाबी हासिल की है। यह कहना शायद अतिश्योक्ति हो  लेकिन सच भी है कि यह काम लगभग उसी तरह का है जिस तरह अकेले मांझी ने बिहार में आम जन  की सहूलियत के लिए बरसों  पहले अपनी मेहनत  से  सुगम मार्ग निर्मित कर लिया था।  भले प्रशासन की इतनी तारीफ करना किसी को उचित न लगे लेकिन   यह तो कह ही सकते हैं   कि आज सभी साधनों  का इस्तेमाल कर प्रशासन ने  माउंटनमैन  मांझी  की भावना से काम किया है। मैंने कल (12 october 2015 ) रतनगढ़ जाकर  माता के दर पर माथा टेका और साक्षी बना  शानदार इंतजामों का ।  0 अशोक मनवानी 

Tuesday, September 29, 2015

लघुकथाचमक

उन्होंने प्रोविडेंट फंड की पूरी राशि निकालकर ,बैंक लोन का पैसा मिलाकर बड़े जतन से मकान बनवाया .मकान के शुभारम्भ के दिन तक वे परिवार के सदस्यों और नौकरों -चाकरों
के साथ नए मकान की दीवारों ,खिडकियों और दरवाजों को चमकाते रहे।
हालाँकि छह साल लगातार चले मकान के काम के कारण उनके चेहरे की चमक चली गयी थी।
अशोक मनवानी
लघु कथा 

बुक शेल्फ 
घर में लंबी -चौड़ी बुक शेल्फऔर उसमे सजी किताबें देखकर आगंतुक हैरत करते ,क्या कमाल की बात है ,इतनी क़िताबे ?सच आपने गजब की लाइब्रेरी बनाई है,रोज पढ़ते होंगे ?
घर मालिक जवाब देते हैं - अरे नहीं भाई,इतना समय किसको है ? दरअसल यह इन्टीरियर डेकोरेशन के लिए बहुत उपयोगी वस्तु है .पढ़ने के लिए कौन वक्त गँवाए ? आप मेरी व्यस्तता जानते ही हैं।ये लाभ जरुर है कि बुक शेल्फ देखने वाले बढ़िया आतंकित हो जाते हैं।
मिथ्या -मंजिल -2005
लघुकथा
वेलकम -वेलकम
बात -बात में ओढ़ी हुई विनम्रता के साथ भैया जी "वेलकम -वेलकम "कहने के आदी थे. 
किसी भी जगह ,किसी भी मौके पर मित्रो से मिलते ही वे पूरी ताकत लगा कर हाथ मिलाते और आदत के मुताबिक़ कहते थे "वेलकम -वेलकम .
आईये सर स्वागत है आपका "
भैया जी से आज गलती यह हो गयी ,उन्होंने विश्राम घाट में शोकाकुल परिवार के एक व्यक्ति को ही यह तकिया कलाम सूना दिया ,वह भी एक बार नहीं ,तीन -चार बार .एक साथ 4 - 6 लोगो ने उनकी इस हरकत के लिए उन्हें खूब खरी -खोटी सुनायी और उपदेश सुनाये सो अलग. गनीमत थी ,भैया जी की बस धुनाई नहीं हुई,लेकिन आज उन्हें इतना अहसास हो गया ,हर जगह नहीं बोलना चाहिए इस तरह -
"वेलकम- वेलकम."
( लघु कथा संग्रह मिथ्या -मंजिल से ,प्रकाशन वर्ष -2005)
लघु कथा 
स्वदेशी अभियान 
शहर के अनेक समाजसेवी आज एक पांच सितारा होटल में मिले। आज का विषय था -खाना खाने के पहले कोई संकल्प भी लिया जाये।अनेक सामाजिक कुरीतियों पर बातचीत हुई। तय यह हुआ कि अब कोई नया विषय चुना जाए। विदेशी वस्तुओ के अधिक इस्तेमाल से शुरू बहस का समापन इस फैसले से हुआ कि आने वाला महीना स्वदेशी अभियान को समर्पित हो और जोर- शोर से यह अभियान संचालित किया जाये। शुद्ध स्वदेशी का प्रचार- प्रसार हो । बस फिर क्या था -अगले हफ्ते होने वाली पार्टी का स्थान एक वनवासी इलाके का पारंपरिक रेस्ट हाउस था। दारू भी देसी थी और मुर्गा भी देसी। समाजसेवियों ने स्वदेशी को ही अपनाया।
लेखक -अशोक मनवानी
आगामी वर्ष से सप्रे संग्रहालय में होगा स्व देवलिया स्मृति आयोजन
स्मृति ग्रन्थ का प्रकाशन भी होगा 

गोष्ठी में समकालीन पत्रकार,मित्र ,शिष्य और प्रशंसक एकत्र हुए 


भोपाल 27 नवम्बर 2012/स्वराज भवन सभागार में सोमवार को स्व भुवन भूषण देवलिया की 21 वी पुण्यतिथि पर उनके व्यक्तित्व और कृतित्व का स्मरण किया गया .अनेक वक्ताओ ने देवलिया जी के मानवीय गुणों और पत्रकारीय प्रतिबध्ताओ को याद किया। इस अवसर पर निर्णय लिया गया कि स्व देवलिया (1937-1991)
के योगदान को रेखांकित करने वाले ग्रन्थ का प्रकाशन शीघ्र किया जायेगा। वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर ने कहा कि आने वाले वर्ष से माधव राव सप्रे संग्रहालय में स्व देवलिया स्मृति आयोजन होगा। उल्लेखनीय है कि देवलिया जी मध्य प्रदेश आंचलिक पत्रकार संघ के प्रथम अध्यक्ष भी रहे हैं। पत्रकारिता से जुड़े ऐसे लोग जिन्होंने राष्ट्रीय सरोकारों से गहरा वास्ता रखते हुए कई नौजवान कलमकारों को प्रेरित ,प्रोत्साहित करने का अनूठा कार्य किया,उनमे स्वर्गीय भुवन भूषण देवलिया का नाम बेहद सम्मान से लिया जाता है। सागर में रहकर देवलिया जी ने जहाँ विश्वविद्यालय के पत्रकारिता के प्राध्यापक रहते हुए विद्यार्थियों को शिक्षित -दीक्षित किया वहीं देशबन्धु ,यूनीवार्ता ,आकाशवाणी और अन्य अनेक संस्थानों को सेवाएँ प्रदान की।उनकी पुण्यतिथि 26 नवम्बर पर अनेक वक्ताओ ने उन्हें श्रधा सुमन अर्पित किए .प्रमुख रूप से राष्ट्रीय एकता परिषद् के उपाध्यक्ष श्री रमेश शर्मा ,श्री राजेश सिरोठिया ,पुष्पेन्द्रपाल सिंह,सुश्री दविंदर कौर उप्पल ,अजय त्रिपाठी, आलोक सिंघई,रामशरण पाराशर ,प्रशांत जैन,प्रदीप पाठक ने यादे ताजा की . आयोजन में श्री पलाश सुरजन ,श्री चंद्रहास शुक्ल ,श्री सतीश एलिया , डॉ अर्पणा ,स्व देवलिया की धर्म पत्नी श्रीमती कीर्ति देवलिया,पुत्र आशीष देवलिया,अरुणा दुबे ,बी के दुबे और देवलिया परिवार के अनेक सदस्य मौजूद रहे। nov.2012